
ग़ज़ा में जब भोजन और सहायता सामग्री पहुंचाने वाले ट्रक अंदर प्रवेश किया तो कई महीनो से भूख से बेहाल लोगों ने ट्रकों को घेर लिया और खाने-पीने का सामान ले लिया.
मानवीय सहायता संगठन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार रात और शनिवार सुबह ग़ज़ा में आटे से भरे 77 ट्रक भेजे थे.
वर्ल्ड फूड प्रोगाम ने कहा, “सभी ट्रकों को रास्ते में ही रोक लिया गया और ज्यादातर खाना उन भूखे लोगों ने ले लिया जो अपने परिवारों को खाना खिलाना चाहते थें.”
डब्ल्यूएफपी की प्रवक्ता अबीर एतेफा ने बताया कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि ट्रक उनके गोदाम तक नहीं पहुंच पाएंगे, इसलिए तय किया गया कि अगर रास्ते में भीड़ मिलती है तो लोगों को सहायता सामग्री ले जाने दी जाएगी.
इसराइल ने 11 हप्तों से ग़ज़ा में नाकेबंदी की थी, जिसे उसने 19 मई को हटाया. इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अब तक जो सहायता पहुंची है, वह लोगों की जरूरतों का केवल 10% ही पहुंचा है.
शनिवार को जिन लोगों ने ट्रकों को घेरा, वे आम नागरिक थे. जिन्हें पता चला था कि आज खाना आ रहा है.
डब्ल्यूएफपी की प्रवक्ता अबीर एतेफा ने कहा, “यह वही लोग थे जो इतने हताश थे की वितरण केंद्र तक पहुंचने का इंतजार भी नहीं कर सकते थे.”
वर्ल्ड फूड प्रोगाम ने ऐसी सड़कों का चुनाव किया जो आम लोगों के नजदीक थी और जहां लुटेरे गिरोहों का कम खतरा हो.
वहां काम कर रहे लोगों ने भीड़ से कहा कि हर कोई सिर्फ एक बोरी आटा ले जाए, लेकिन लोग इतने भूखे थे कि किसी को रोकना मुश्किल हो गया.
डब्ल्यूएफपी ने आगे कहा, “लगभग 80 दिनों तक पूरी तरह से नाकेबंदी के बाद भूखे लोग किसी भी खाने वाले समान से भरे ट्रक को यूं ही नहीं जाने देंगे.”
संयुक्त राष्ट्र ने कुछ दिन पहले कहा था कि इसराइल के जमीनी अभियानों और निकासी आदेशों के करण 6 लाख लोग फिर से विस्थापित हो गए हैं. तथा संयुक्त राष्ट्र समर्थित आईपीसी की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में लगभग 5 लाख लोगों को भूख के भयावह स्तर का सामना करना पड़ेगा.
संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने ये भी कहा था की ग़ज़ा में सहायता पहुंचाना विश्व की जिम्मेदारी है.