मोदी सरकार ने 20 सालों से चले आ रहे मनरेगा क़ानून ( महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट ) की जगह लेने के लिए एक नया बिल पेश किया था. जिसे मंजूरी मिल चुकी है.
संसद में बीते हफ़्ते पारित ‘विकसित भारत-जी राम जी’ बिल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है. अब ये एक क़ानून बन गया है.
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार साल 2005 में मनरेगा क़ानून लेकर आई थी जिसके तहत ग्रामीण इलाके के परिवारों को साल में 100 दिन रोज़गार की गारंटी थी.
‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यूपीए सरकार के दौर की मनरेगा योजना की जगह ‘विकसित भारत-जी राम जी’ लेगा.
इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में मजदूरों को 125 दिनों के गारंटीड मज़दूरी वाले रोज़गार का प्रावधान किया गया है.
सरकार का कहना है कि नई योजना को ‘विकसित भारत 2047’ के नेशनल विजन के मुताबिक़ ग्रामीण विकास का ढांचा तैयार करने के मक़सद से लाया गया है.
मनरेगा और केंद्र सरकार के नए अधिनियम में नाम के अलावा भी कई बदलाव किए गए हैं जिसे लेकर विपक्षी दल सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.